जीवन बहुमूल्य और क्षणिक है सांसे ईश्वर की देन। ऐसे में अभिमान से बचते हुए जो नेकियां हम करते हैं .. वही हमारी साथ जाने वाली। असल कमाई है।बृंदावन के परम श्रद्धेय संत शिरोमणि स्वामी प्रेमानंद जी महाराज के वचनों से प्रभावित मेरी हर कविता पाठक को दिखेगी।जीवन का यथार्थ और अर्थ ही जिसका मर्म है।