कवि राजिन्दर ब्याला की कविताओं का मैं पाठक रहा हूं और आज भी जब उनकी कोई नयी कृति प्रकाशित होकर आती है तो वो उसकी एक-दो प्रतियां अवलोकनार्थ/समीक्षार्थ ससम्मान दे जाते हैं। इसलिए उनकी कविता के कथ्य-कथन-क्राफ्रट से मैं भलीभांति परिचित हूं। उनकी कविता शब्दों की कविता से अधिक चिन्तन-मनन सामाजिक जीवन-दर्शन है। कविता का कथ्य सामाजिक हो या पौराणिक सर्वत्र एक नवीनता मिलती है यह नवीनता कथ्य और क्राफ्रट यानी शिल्प-कला की है। किन्तु यहां यह कृति उससे पृथक ‘प्लेटफार्म’ लिए है। इसमें उन विद्वानों के महत्वपूर्ण समीक्षण के--- निबन्ध संकलित हैं।