दिव्यांग जनों का सारा जीवन उनके साहस उनके हौसले और उनकी सकारात्मक सोच का परिचायक होता है। समस्त दिव्यांग जन अपने भविष्य निर्माण के लिए एक सामान्य व्यक्ति की तरह ही जीवन में आने वाली सभी चुनौतियों का सामना करते हैं लेकिन उन्हें कठिनाइयाँ कुछ अधिक होती हैं। उनकी रचनात्मकता उनकी सहनशीलता और जीवन का सम्मान करने की उनकी प्रेरणादायक शक्ति ऐसे कुछ उनके गुण हैं जो स्वाभाविक रूप से दिव्यांगजनों की श्रेष्ठता को प्रमाणित करते हैं। समाज में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका को केंद्र में रखकर लिखा गया यह उपन्यास ‘मेरा तुम्हारा आसमान’ उनके प्रति सच्चा समर्पण है।