प्यार से तुम्हारी मुलाक़ात तभी हो जाती है जब से तुम होश संभालते हो। कुछ मील दूर नफ़रत भी साथ हो जाती है। रोज़रोज़ प्यार बटोरते नफ़रत झेलते और बाकी मिलते जाने वाले अनुभव लिए तुम अपनी शख़्सियत तराशते रहते हो। यह शख़्सियत इस मिलीजुली विरासत को कंधे पर उठाए दुनिया से रुबरु होती अपने ऊपर और परतें चढ़ाती चलती है।ज़िंदगी बटोरते हँसते रोते घुटतेटूटते वक़्त के साथ डूबतेउबरते चेहरे बदल जाते हैं साथी बदल जाते हैं घर शहर पसंद नापसंद असलियत शख़्सियत सब बदल जाते हैं।हवा में उड़ती शख़्सियत और मन में दफ़्न जज़्बात दोनों के बीच की खींचतान ही जब ज़िन्दगी हो जब शख़्सियत आसमान पर सब लिखना चाहती हो और उबलते जज़्बात उफ़ान पर आकर भी अटक जाते हों ऐसे ही हिसाबों में फँसे इन दिलवालो की सुनते हैं। कौन सा दर्द का दरिया पार किया और किस प्यार के बवंडर में दबे हैं।जज़्बात जो ज़िंदगी से दिखते हैं… देखेंएहसास जो शायरी से दिखते हैं… देखेंचलो देखें