किताब के बारे में: राम इस सृष्टि के आराध्य हैं। सभी को राम प्रिय हैं और राम को भी सभी प्रिय हैं लेकिन उनके अतिप्रिय लोगों की सूची में एक नाम रावण भी था। रावण तो खुद राम का सेवक ही था। फिर ऐसा क्या हुआ कि वह उनका शत्रु बनकर सामने आ गया? यह किताब राम के दर्शन को रावण की नजर से देखने की कोशिश करती है। यह किताब उन प्रश्नों के भी जवाब खोजती है जो कई जगह पर उठते रहे हैं। यह किताब इस बात का भी जवाब देती है कि आखिर क्यों अशोक वाटिका से सीधे राम के पास आने पर सीता को राम स्वीकारने से इनकार कर देते हैं? क्यों सीता को अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ता है। बड़ा प्रश्न यह भी है कि क्या सीता लंका गई थीं? अगर सीता लंका नहीं गई थीं तो फिर कौन सी स्त्री लंका गई थी और उसका राम-रावण से क्या संबंध था? क्या सच में माता कैकेयी ने राम के लिए वनवास मांगा था? या फिर खुद राम ने अपने लिए वनवास और भरत के लिए राजगद्दी मांगी थी लेकिन राम ने ऐसा क्यों किया? रामायण से जुड़ी प्रमुख घटनाओं को यह किताब एक अलग नजरिए से देखती है।
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