मेरे साई की चौखट.....एक भाव है.....मन की उड़ान के पंख हजार है। एक होड़ की तरह ये संसार है। इस आने जाने में गुजरती है पीढ़िया मंजिल तभी मिलेगी जब पार हो सीढ़िया करुणा के तुम सागर सबके दुख निवारक सबके दिल के तुम ही राम तुम् ही घनश्याम ओम साई राम.. ओम साई राम ... ओम साई राम