संवेदनाएँ और अनुभूतियाँ ही एक व्यक्ति को रचनाकार बनाती हैं। ज़िंदगी के हालात से जूझते हुए वक़्त के धूप और साये की एहसास को समझना और उसे अपनी रचनाओं में दर्ज करना रचनाकार बनने की शर्त है। इसी शर्त को पूरा करते हुए कवि शैलेंद्र कुमार पांडेय ने ग़ज़लों नज़्मों और कविताओं को लिखा और संग्रह का नाम दिया ‘मेरी धूप मेरा साया’। बक़ौल शैलेंद्र कुमार पांडेय- ‘मानवीय जीवन से जुड़ी संवेदनाएँ और अनुभूतियाँ मेरे ज़ेहन में धूप बनकर छा गई हैं और साये के रूप में मुझमें एक कवि शायर और लेखक को जन्म दे दिया है।’