मेरी कहानी नारायण के साथ ये कोई धार्मिक किताब नहीं है इसमे बतया गया है कि आज हम कैसा भौतिकता में लीन हो गये हैं और कुछ भौतिक आवश्यकता को पूरा करने में ही सारा जीवन लगा रहे हैं लकिन ये गलत है हम ये भूल गए हैं कि जीवन का क्या लक्ष्य है हमे ये जीवन क्यु दिया गया है लकिन साथ मे ही इसमे मेरे और नारयण की मधुर कहानियों भी हैं और बहुत सारी बातें