इस पुस्तक में सात कहानियाँ प्रत्येक कहानी में एक सामाजिक बुराई का उल्लेख जो कि मनुष्य के मन और व्यक्तित्व की दुर्बलता के कारण जन्म लेती है जिस पर ध्यान न देने कारण यह बलवती हो जाती है का निराकरण बताने का प्रयास किया गया है। निराकरण सदैव वेदमूलक ही है जो कि प्रत्येक रचना का सर्व महत्वपूर्ण अंग है जिसके कारण प्रत्येक कहानी अति रूचिकर हो जाती है और पाठक की के जिज्ञासु मस्तिष्क में कौतूहल बनाए रखती है। कहानियों में के कथानक में भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के मूल तत्वों का सुन्दर समायोजन करने का प्रयास भी किया गया है।