मेरी वेदना यह कवि की अंतर्व्यथा है जिसे कवि ने अपने जीवन के प्रारंभिक वर्षों में लिखना आरंभ किया था। जैसे जैसे समय बीतता गया कवि की यह अंतर्व्यथा प्रकारांतर में व्यष्टि से समष्टि की ओर विस्तृत होती गई और अंततः यह विश्व वेदना के रूप में कवि के अंतःकरण में प्रतिभाषित होने लगी। चार खंडों में लिखा गया यह काव्य क्रमशः विरहभक्तिज्ञान और वैराग्य के भाव को प्रतिपादित करता है