युवतियां एक विशेष उम्र में खुद की असावधानि और युवकों की मीठी मीठी प्रेमभरी बातों में बहक कर उनके प्रेम जाल में फंस कर अपना सर्वस्व लुटा बैठती हैं। और जब समझ में आता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है तब युवती के पास आत्महत्या के सिवाय और कोई मार्ग नहीं रह जाता है। ऐसी ही इस कहानी में 'मिली' युवा पुलिस ऑफिसर के प्रेमजाल में फंस जाती है। यहां से बचने के लिए शादी का प्रस्ताव ऑफिसर के सामने रखती है लेकिन चरित्रहीन कह कर मिली को निकाल दिया जाता है। भाग्यवश लिली उसे बचाकर उसका पालन पोषण करती है। समय पर उनको बेटा होता है। बेटा बड़ा होता है लेकिन मिली को वह माँ नहीं मौसी संबोधन करता है। लिली और उसका पति वही पुलिस ऑफिसर और मिली के बेटे को गोद लेकर दोनों को सम्मान से जीने के लिये योग्य सहायता करते हैं।