मीरां के अध्ययन पर मेरी विशेष रुचि के कारण ही पीएच.डी. मीरां के व्यक्तित्व-कृतित्व पर लिखी। तब मैंने पाया कि मीरां की भक्ति राजस्थान से बृज और बृज से गुजरात जाकर जो विशिष्ट रूप से विकसित हुई है उसी आधार पर मीरां के गुजराती पदों का अध्ययन और होना चाहिए। गुजराती पदों का विशेष संकलन करते हुए प्रस्तुत पुस्तक में मैंने नौं विषयों पर विशिष्ट अध्ययन किया है। विशिष्ट समीक्षाओं के द्वारा नये विषय भी सामने आये हैं। यह अध्ययन अभी तक विद्वानों से अछूता रहा है।