मूल पुस्तक ‘चित्र चकमक लागै नहीं’ और ‘अपने माहिं टटोल’ के पंद्रह अमृत प्रवचनों का संकलन है यह पुस्तक।ओशो का जीवंत संदेश है प्रेम। बस प्रेम। प्रेम प्रर्याप्त है। प्रेम से ही चित्त में चकमक लगेगी रूपांतरण होगा।और तुम अनुभव कर लोगे ओशो के उपर्युक्त वचनों को उनके जीवन-स्वीकार प्रेम का उनके प्रेमपूर्ण समग्र-स्वीकार को। और तब खिलेंगे प्रेम के फूल।और तब उठेगी चिर-परिचित सुवास-सच्चिदानंद की।
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