“मौन के आलाप” मेरे मन का आंगन समूचे समाज का दर्पण है जिसमें प्यार तकरार अचरज कृतज्ञता जैसे अनगिनत रंग हैं। किन्तु सबसे प्रखर रंग है जिज्ञासा का अनुत्तरित प्रश्नों का समाधान पाने का। इसी रंग की प्रेरणा ने मन के मौन को झंकृत कर दिया । मौन के आलाप में मेरे आंगन में बिखरे हर रंग की तान शामिल है। लड़कपन गांव की मानव धर्मिता प्रकृति का सम्मोहन जीवन दर्शन जैसे महत्वपूर्ण पहलू मेरे मन के तारों को छेड़ते रहे जिसके परिणामस्वरूप कुछ पन्ने इकट्ठे हो गए। इन्हीं पन्नों को सहेज कर मौन के आलाप के रूप में सुधी पाठकों को सौंपने का संकल्प किया है। इस प्रथम प्रयास को यथोचित प्रतिसाद की उम्मीद है।