यह क़िस्सों की किताब है। कुछ कपोल कल्पना कुछ आपबीती कुछ दास्तानगोई कुछ बड़बखानी। अँग्रेज़ी में जिसे कहते हैं- ''नैरेटिव प्रोज़’। वर्णन को महत्व देने वाला गद्य ब्योरों में रमने वाला गल्प। कहानी और कहन के दायरे से बाहर यहाँ कुछ नहीं है। यह ‘हैप्पी कंटेंट’ की किताब है। कौतूहल इसकी अंतर्वस्तु है। क़िस्सों की पोथी की तरह किसी भी पन्ने से खोलकर इसे पढ़ा जा सकता है।