सिनेमा अनेक कलात्मक विधाओं का सम्मिश्रण है और इसे समझने के लिए संवेदना के साथ दृष्टि भी होनी चाहिए। आज लगभग सभी विश्वविद्यालयों में सिनेमा को विषय के तौर पर पढ़ाया जा रहा है और चाक्षुष प्रस्तुति होने के नाते इसमें साहित्य को भी प्रदर्शित करने की अभूतपूर्व क्षमता है। मेरा प्रयास हमेशा उस तल को विस्तार देने का होता है जहां साहित्य और सिनेमा मिलते हैं। - विमलेन्दु