इस संकलन में शामिल करने के लिए मैंने अपनी लगभग सौ कहानियों में से ऐसी कहानियां चुनी हैं जिनमें पिता के विविध रूपों के दर्शन होते हैं। कई बार पिता बिना कहे कुछ बोलते हैं तो कई बार मुखर होकर। उनके मौन और शब्दों के पीछे के अर्थों को समझने में अकसर पूरी जिंदगी निकल जाती है। जब तक वे समझ में आते हैं तब तक समय निकल चुका होता है। फ्रांस के प्रसिद्ध कहानीकार जी-डी- मोपांसा की कहानी ''दि फादर'' का मैंने ''पिता'' शीर्षक से अनुवाद किया है। उसे भी इस संग्रह में शामिल किया गया है। यह कहानी अपने बच्चे के लिए पिता की तड़प की मार्मिक कहानी है। इसी तरह का कुछ भाव मेरी कहानी ''कोई रास्ता है तुम्हारे पास'' में भी देखने को मिल सकता है। हो सकता है किसी कहानी में आपको अपने पिता की झलक मिल जाए। आपकी बेबाक प्रतिक्रियाएं ही बताएंगी कि यह संकलन किस सीमा तक सफल रहा है।---डॉ रमाकांत शर्मा