आज के परिवेश में हर व्यक्ति किसी न किसी विचारधारा से जुड़ा हुवा। व्यक्ति जिस विचार से जुड़ा है उसकी पहचान भी उसी विचार से की जाती है। वामपंथी राष्ट्रवादी जैसी कितनी विचार धाराएं लोगो का पहचान बनी हुयीं है। ऐसे समय मे मेरा विचार किसी विचारधारा के अधीन न होकर नदी की अल्हण धारा सा मुक्त है जिसमे राष्ट्रवन्दना से लेकर कुरीतियों पर कुठाराघात भी है। मुझे आशा है मेरे विचारों की धारा आपको सराबोर करेगी