मेरी किताब मुसफिरनामा... इसे एक शेर नज्म या गज़ल का संग्रह कहने से बेहतर है जज्बातों की किस्सागोई कहना। जिंदगी की राह में खुद के और हमराहों के साथ जो कुछ भी वाकये घटे उन्हें अल्फाजों में छो के एक माला के रूप में दोस्तों के सामने रख देना ही इस किताब की नींव का ख्याल है। जज्बात जब अल्फाजों की शक्ल इख़्तियार करते हैं तो उन्हें किसी ख़ास पैमाने में ढालना थोड़ा मुश्किल लगता है इसीलिए मेरी पढ़ने वालों से गुजारिश है कि मुझ वे बहर के जज्बात पढ़ें और महसूस करें उन्हें पैमानों के मुश्किल जाल में बांधने के लिए पूरी उम्र पड़ी है। उम्मीद है आप सबको ये जज्बातों की सौगात पसंद आएगी। शक्रिया