इस उपन्यास में एक रिक्शे वाले के जीवन पर आधारित रिपोर्ताज भी शामिल है जिसे पढ़ कर पाठक सूक्ष्मता से एक रिक्शा चलाने वाले व्यक्ति का जीवन-दर्शन कर सकते हैं। ख़ुद लेखक के शब्दों में कहें तो यह उपन्यास उन की जीवन-डायरी है। इस उपन्यास में लेखक के निज जीवन के बिंब अपने मार्मिक रूप में पाठकों के अंतर्मन को कुरेदते हैं और ऐसी एक छाप छोड़ जाते हैं जो टीस तो देती है लेकिन आनंद भी देती है। एक पत्रकार किस तरह दुनिया देखता है और उस की संवेदनशीलता किस प्रकार उस के जीवन को प्रभावित करती है यह उपन्यास पढ़ कर जाना जा सकता है। एक पाठक के लिए इस से सुंदर क्या हो सकता है कि वह एक ऐसा उपन्यास पढ़े जो दिल पर चोट करे और संग-साथ मरहम भी रखता जाए। इस उपन्यास को मरहम और चोट दोनों के संयुक्त आनंद के लिए पढ़ा जाना चाहिए।