‘न आने वाला कल’ मोहन राकेश का प्रसिद्ध उपन्यास है जिसमें एक विशेष परिस्थिति में फँसे व्यक्ति की प्रतिक्रियाओं को बहुत सूक्ष्म रूप में वर्णित किया गया है। यह न केवल समाज में फैली अनैतिकता को अभिव्यक्ति देता है बल्कि उसको झेलते व्यक्ति की त्रासदी का मार्मिक चित्रण भी प्रस्तुत करता है। घटना और अनुभूति का इतना उत्तम संगम अन्यत्र दुर्लभ है। यह उपन्यास तेजी से बदलते आधुनिक जीवन में व्यक्ति के आर्थिक संघर्ष स्त्री-पुरुष संबंध तथा साहित्य और कला की दुनिया को बड़ी सूक्ष्मता से चित्रित करता है|
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