नफ़रत-ए-घराना एक ऐसी किताब है जो हर किसी को यह महसूस कराएगी कि शायद यह उन्हीं की कहानी है। इस किताब का हर एक लफ्ज़ दुःख और दर्द के साथ-साथ उम्मीदों से भरा है। जो लोग ज्यादातर लड़के अपने मन की भावनाओं को बाहर नहीं ला पाते यह किताब उन सभी की उन कुछ अनकही भावनाओं में लिपटी है। कवि के शब्दों में बोला जाए तो कवि ने इस किताब में यह लिखा है.......ना नज़्म ना शायरी ना ग़ज़ल लिखता हूँमैं बस दर्द लिखता हूँ......