नगरी-सिहावा अंचल का ऐतिहासिक अनुशीलन प्रस्तुत पुस्तक में प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक अंचल के इतिहास एवं संस्कृति का उल्लेख किया गया है। छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी का उद्गम अंचल से हुआ है। नदी घाटी का सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्राचीनतम सभ्यता का विकास नदियों के किनारे हुआ है। महानदी घाटी में मानव सभ्यता का उद्भव और विकास हुआ है। जहाँ से नदी की जलधारा के प्रवाह के साथ एक समृद्ध संस्कृति की धारा निरंतर प्रवाहित हो रही है। अंचल गोंडवाना भू-भाग का अभिन्न अंग रहा है। जहाँ गोंड़ राजाओं का शासन था। जिनके पुरातात्विक धरोहर गौरवशाली इतिहास और संस्कृति का दिग्दर्शन करवाती है। अंचल पहले स्वतंत्र था तत्पश्चात कांकेर बस्तर के राजाओं के अधीन एवं मराठों और अंग्रेजों के प्रभावान्तर्गत रहा। ब्रिटिश काल से लेकर आधुनिक काल तक प्रशासनिक परिवर्तन के साथ अग्रसर है। स्वतंत्रता आंदोलन की विविध घटनाओं के साथ अंचल के वीर धरती पुत्रों के योगदान को रेखांकित किया गया है। जिन्होंने तन मन और धन से अपना सब कुछ न्यौछावर किया। अंचल में मनाया जाने वाला लोक पर्व एवं परम्पराओं की मौलिक मान्यताओं को जो समाज को सकारात्मक संदेश देने के साथ-साथ जीवन जीने की कला सिखाती है। प्रस्तुत पुस्तक में विविध पहलुओं का उल्लेख किया गया है ।