ये कहानी मेरी तो नही पर इस अजीब-ओ-गरीब कहानी को लिखने से मैं ख़ुद को रोक नही सका। मंसूरी को पहाड़ों की रानी ऐसे ही नही कहते। वहाँ पहुँच कर लगता है किसी जन्नत में पहुँच गए हैं। कब बादल आपके बगल से गुज़र जाएं पता नहीं चलता। कभी अचानक झीनी सी हल्की बारिश शुरू हो जाती है और आपके तन और मन दोनो भींग जाते है। --- लेखक का जन्म वर्तमान प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुआ था और ये लखनऊ शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही इनकी साहित्य व लेखन में रुचि थी। ये मूलतः अध्यात्म से प्रभावित रहते हैं और इन्हें संगीत में विशेष रुचि है। अपने परनाना व उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर के हिंदी के प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय पंडित श्रीनाथ मिश्र का लेखक पर विशेष प्रभाव रहा है। खाली समय में अध्ययन लेखन व संगीत सुनना इनके प्रिय कार्य हैं। इन्होंने अंग्रेजी साहित्य से एम.ए. किया है। ‘रंग-ए-लखनऊ’ इनका पहला प्रकाशित होने वाला संस्मरण संकलन है जिसमे लेखक ने लखनऊ शहर से जुड़ी अपने बचपन की यादों और कुछ विचारों को रोचक व हास्य-व्यंग्य की शैली में लिखा है।
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