हैदराबाद तेलंगाना निवासी श्री उमेश चन्द्र यादव ने ‘नकली मुस्कान’ में समाज की बुराईयों पर प्रहार किया है । इसमें गद्य और पद्य दोनों विधाओं का समावेश पुस्तक को और अधिक रोचकता प्रदान कर रहा है । कवि ने जहां एक तरफ अपनी रचनाओं के माध्यम से अपने मन के उद्गार व्यक्त किये हैं...अपनी भावाभिव्यक्ति प्रस्तुत की है वहीं गद्य में समाज की कुरीतियों की ओर पाठकों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है और उनके दुष्प्रभावों के परिणाम गिनाये हैं । कुल मिलाकर इस काव्य और गद्य पुस्तक में कवि ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज सुधार की बात कही है और समाज को दिशा देने का प्रयास किया है। रोचक मनोरंजक और भावना में डूबी कलम निश्चय ही प्रभावपूर्ण सिद्ध होगी। इस पुस्तक में नारी की पीड़ा भी है और समाज का ज्ञान भी। भावों की श्रंखला भी है तो देश के प्रति प्रेम भी । कूटराजनीति की निन्दा भी है और भाईचारे का संदेश भी ।