1970 के दशक की दिल्ली और उसके संघर्ष की दास्ताँ को वयां करता उपन्यास है नंगे शहर का सफरनामा. कहने के लिए टो सब कुछ आसन हे पर उसके अन्दर की कहानी कुछ और है जिसे समझाने का प्रयास सुभाष अखिल जी ने किया हे. सुभाष अखिल जी ने किन्नर बिमर्ष पर बहुत काम किया है और उनका यह उपन्यास बहुत हि नया संघर्षमय जीवन दर्शाता हे.