युगप्रर्वतक साहित्यकार नरेंद्र कोहली का एक विशाल पाठक वर्ग है जो उनकी रचनात्मकता का निरंतर ‘सागर मंथन’ कर बहुमूल्य रत्न प्राप्त करता है। उनकी कृतियों पर फ़िल्म और धारावाहिक बन रहे हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से अपने युग को प्रभावित किया है। ‘अभ्युदय’ और ‘महासमर’ जैसी पुराकथाओं के माध्यम से नरेंद्र कोहली ने आज के समय के प्रश्नों के समाधान खोजे हैं। उनका महत् उद्देश्य समाज की बेहतरी के लिए रचनाओं का सृजन करना है। इसी प्रक्रिया में वे विवेकानंद की जीवनी ‘तोड़ो कारा तोड़ो’ के द्वारा आज के समय में आदर्श मूल्यों की स्थापना करते हैं। नरेंद्र कोहली अपने नायकों- राम कृष्ण और विवेकानंद के द्वारा निरंतर ऐसे समाधन की खोज में हैं जो इस मानव सभ्यता को स्वयं नष्ट को होने से बचा सके।उनके व्यंग्य लेखन में उनकी प्रखर व्यंग्य दृष्टि के दर्शन होते हैं तो नाटकों में सशक्त संवाद शैली के। ऐसे विराट व्यक्तित्व को वही जान सकता है जिसने उन्हें बहुत समीप से देखा-परखा हो। प्रतिष्ठित व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय के अपने गुरुवर नरेंद्र कोहली के साथ 56 वर्ष पुराने संबंध है।वे नरेंद्र कोहली को अपने साहित्यिक और व्यक्तिगत जीवन की पाठशाला मानते है।इस पाठशला में प्रेम जनमेजय ने नरेंद्र कोहली साहित्य का गहन अध्ययन मंथन और नरेंद्र कोहली के अनुकरणीय व्यक्तित्व का विश्लेषण किया है।‘नरेंद्र कोहली एक शिनाख्त’ युगप्रर्वतक साहित्यकार के विशाल रचनात्मक सागर को गुणवत्तापूर्ण गागर में भरने का स्तुत्य कर्म है।