नारी के जीवन में जो प्रफुल्लता शांति और आनंद होना चाहिए वह उसे उपलब्ध नहीं हो पाता है और नारी का आनंद बहुत अर्थपूर्ण है क्योंकि वह घर का केंद्र है। अगर घर का केंद्र उदास दीन-हीन थका हुआ हारा हुआ है तो सारा घर सारा परिवार जो उसकी परिधि पर घूमता है वह सब दीन-हीन उदास और हारा हुआ हो जाएगा।.