Narkesari

About The Book

वह इस बार मुझ पर कूदा नही बल्कि मेरी ओर झपटा वह पिछली हार को भूला नही था इसलिए वह पहले ज्यादा चाक- चौबंद था । उसके दिमाग मे यही था की मै निश्चित ही कोई ऐसा कदम उठाऊंगा जो उसे चौंका दे । मैने कदम उठाया भी पर उसे छकाने वाला नही बल्कि मैने उसके बढ़े हुए पंजे अपने पंजों मे थाम लिए । यह उसको आश्चर्य मे डालने के लिए काफी थी । मैने उसकी ताकत का अंदाजा लगा लिया वह एक असीम ताकत का स्वामी था शायद इसलिए इस नगरी के लोग उनसे जीत नही पा रहे थे । कहानी आकाश सिरीज़ की पहली किताब मायाजाल से शुरू हुई और अब इस कहानी का ये चौथा पडाव है यानी आकाश सिरीज़ की चौथी किताब . रहस्य रोमांच से भरपूर उसपर हलचल ये भी है के ये सफ़र अभी थमा नहीं है ...ज़ारी है .
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