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About The Book
Description
Author
जब हम बच्चे होते है तो हमें पेन्सिल से लिखना सिखाया जाता है और फ़िर जब हम थोड़े बड़े होते है तो कलम से शायद इसलिए कि अब तक जो हम ग़लती करते थे उसे आसानी से मिटाया जा सकता था पर अब नही जीवन में गलती सब से होती है हम से भी कई दफ़ा हुई है मग़र एक ही गलती को बार बार दोहराना नहीं चाहिए बल्कि उसे सुधारना चाहिए। खैर हम इंसानों के दिमाग़ में ये बात कहा आती है इंसान का दिमाग़ इतना ही होता है कि अगर उसे जानवर कह दिया जाए तो वो नाराज़ हो जाता है और शेर कहो तो वो ख़ुषी से झूम उठता है.........