यह कहानी है दो महिलाओं के संघर्ष की एक महिला सहकर्मी है तो दूसरी धर्मपत्नी। सहकर्मी के द्वारा झूठे आरोप में फंसाए गए पति को बचाने के लिए पत्नी को बड़े ही विचित्र तरीके से एक ऐसी तरकीब मिलती है जो उसके पति को तो बचा लेगा पर उसे दुनिया के सामने शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी। फिर पत्नी ने क्या किया? क्या उसने उस तरकीब को अपनाया पति को बचाने के लिए? कैसे उसे वह तरकीब मिली? इतना भी हैरान न हों बस पढ़ डालिए इस लघु उपन्यास को। एक ही बैठक में इसे पढ़ डालने को विवश हो जाएंगे आप।<br>विनय पाठक की लेखनी में गजब की सादगी मिलती है। हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में इन्होंने लघुकथा कहानी लेख हास्य-व्यंग्य उपन्यास लिखा है और कभी किसी पाठक को ऐसा महसूस नहीं होता <br>कि वह किसी शब्द या किसी वाक्य का उद्देश्य पाठकों पर रौब जमाना है। इनकी रचनाओं में समाज में व्याप्त विसंगतियाँ तथा सरोकार परिलक्षित होती हैं। सहजता और यथार्थ का ऐसा संयोग ये परोसते हैं कि पाठक को महसूस होता है कि वह अपने आसपास के पात्रों को ही पढ़ रहा है देख रहा है महसूस कर रहा है। लेखन शैली पाठक को कहानी पूरा । पढ़े बिना उठने नहीं देती।
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