आज ई-बुक वेब साईट इत्यादि इन्टरनेट की अनेक विधाओं के द्वारा नित नयें कवि शायर साहित्यकार गीतकार लोगों की नजरों के सामने हैं फिर भी जो बात प्रकाशित होने वाली पुस्तकों में है वो बात इन तमाम विधाओं में कहाँ । इसी बात को ध्यान में रखते हुए नव सृजन-एक सुन्दर प्रयास संस्था के अंतर्गत नव पल्लव साझा काव्य संकलन निकालने का विचार मन में आया । नव पल्लवों को नव पल्लव से जोड़ना बेहद दुष्कर कार्य था । इस दुष्कर कार्य को प्रिय अविनाश सिंह ने सहज रूप से संभव कर दिखाया । यह अविनाश सिंह जी के सतत प्रयास का ही फल है जो आज नव पल्लव आपके हाथों में है ।