’साहित्यपीडिया’ की ’पोएट्री राइटिंग चैलेंज’ प्रतियोगिता के तहत संगृहीत ये कविताएं कवि की बहुजन दलित और अंबेडकरवादी चेतना से लैस रचनाएं हैं। इससे पहले कवि के दो कविता संग्रह ’बीमार मानस का गेह’ और ’विभीषण का दुःख’ प्रकाशित हैं जो दलित साहित्य के अंतर्गत एक स्थान रखते हैं और काफ़ी चर्चित रहे हैं। हिंदी दलित साहित्य में कवि का देश में अच्छा-खासा नाम है और हिंदी की मुख्यधारा की कविता में भी महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। कवि मुसाफ़िर बैठा की ये कविताएं अपने शिल्प गठन और ट्रीटमेंट में विशिष्ट हैं अलग से चिन्हित करने योग्य हैं और पाठकों को सहज ही आकर्षित करने में सक्षम हैं।