Neeel Nadi ke Kale Saye भारत का प्रतिभा सम्पन्न महत्वाकांक्षी विशेषज्ञ मानव संसाधन अच्छे अवसर पाकर सहज ही विदेश का रुख कर लेता है ज्यादा धन और सम्मान कमाने की लालसा में और लगभग शत प्रतिशत अपनी अभिलाषायें पूर्ण कर लेने में सफल भी होता है लेकिन अकस्मात किसी के साथ कभी कुछ ऐसा भी घटित हो सकता है जिसकी उसने कभी कल्पना भी न की हो इसी बात की बानगी को लिपिबद्ध करता है ये उपन्यास “नील नदी के काले साये” पूर्वी अफ्रीका के देश इथियोपिया में अकारण ही ऑन ड्यूटी अपहृत हुये मोहसिन को जिन परिस्थितियों से उस दौरान जूझना पड़ा उसी त्रासदी का दस्तावेज है “नील नदी के काले साये” जो व्यवस्था पर कुछ सवाल भी खड़े करता है।