नींव यानी जड़ या आधार। अगर किसी मकान की नींव कमजोर होगी तो उसे धराशायी होने में देर नहीं लगेगी। उसी प्रकार यदि इंसान के चरित्र या अन्त:करण की नींव मजबूत नहीं है तो उसका पतन निश्चित ही है। इस पुस्तक में इंसान की तुलना एक पुस्तक से की गई है। जिस प्रकार 10 प्रतिशत कवर और 90 प्रतिशत पृष्ठों से निर्मित एक पुस्तक की सार्थकता अंदर के पृष्ठों में दी गई जानकारी से प्रमाणित होती है ठीक वैसे ही इंसान का बाह्य रूप (10%) उसके अन्त:करण (90%) की सार्थकता से ही स्पष्ट होता है। इसी विषय पर केंद्रित सरश्री की पुस्तक ‘नींव नाइन्टी’ पाठकों के सर्वांगीण विकास की दिशा में मील का पत्थर है। पुस्तक में संपूर्ण चरित्र सौगात का सूत्र निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त नींव नाइन्टी मजबूत करने के सभी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। जिससे पाठक अपने मानसिक बौद्धिक शारीरिक और आध्यात्मिक परिपक्वता को नया आयाम देकर समाज तथा देश के लिए प्रेरणा की जीवंत मिसाल बन सकते हैं। पुस्तक का मूल उद्देश्य पाठकों के अंदर छिपे सद्गुणों को विकसित कराना है जिससे वे पृथ्वी लक्ष्य आसानी से प्राप्त कर सकें। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए पुस्तक में महात्मा गाँधी मदर टेरेसा विवेकानंद और संत तुकाराम जैसे महापुरुषों और विभिन्न धर्मों की शिक्षाओं का हवाला दिया गया है। पुस्तक में हर बातें इतनी बारीकी से समझाई गई हैं कि पाठक आसानी से इसका लाभ लेकर अपना और औरों का जीवन सार्थक कर सकते हैं। पंचलाइन :- अगर हमें पृथ्वी लक्ष्य प्राप्त करना है और देश तथा समाज के लिए कुछ अच्छा करना है तो अपने चरित्र की नींव मजबूत बनाना होगा। अंत:करण में छिपे शून्य से साक्षात्कार कर हम आदर्श और औरों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकते हैं। पुस्तक ‘नींव नाइन्टी’ का अध्ययन हमारे जीवन की दशा और दिशा को एक नया आयाम देनेवाली है।