काव्य संग्रह नेह के धागे में रचनाकार ने भारतीय समाज में संबंधों की बारीकियां को बहुत ही सूक्ष्मता और सहजता के साथ वर्णित किया है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संबंधों के ताने-बाने में आ रही मिलावट और खटास को बखूबी उकेरा है।सरल भाषा शैली में रचित रचनाएं निश्चित रूप से पाठकों का ध्यानाकर्षण करेंगी।