कवि (नूर मोहम्मद) ने अपने काव्यों में सूफ़ीमत मसनवी शैली प्रेमाख्यान परम्परा पूर्ववर्ती काव्यों रीतिकाल के प्रभावानुरूप काव्यशास्त्र---रस अलंकार नायिका-भेद आदि का अनुसरण किया है और अपनी प्रतिभा का पूर्ण परिचय दिया है। कवि ने फ़ारसी भाषा के माधुर्य की श्रेष्ठता से अभिभूत होने के बाद भी अपनी भाषा-बोली अवधी को ''इन्द्रावती'' और ''अनुराग बाँसुरी'' में माध्यम बनाया है। कवि का अवधी भाषा पर पूर्ण अधिकार है। कवि ने फ़ारसी संस्कृत अवधी और अपनी स्थानीय बोली के ठेठ शब्दों का ऐसे सामञ्जस्य के साथ प्रयोग किया है कि काव्यभाषा की सहज गति में स्वाभाविकता निरन्तर विद्यमान है और माधुर्य के साथ लालित्य बढ़ गया है।---इसी पुस्तक के ''सूफ़ी कवि नूर मोहम्मद'' से.