प्रस्तुत उपन्यास मानसिक अन्तर्द्वन्दों की एक बहुत सूक्ष्म परिभाषा है। जो सरलतम लहजे में पाठकों के समक्ष रखी गई है तथा बेहद सहज गति से अंजाम तक पहुँचती है और उसी सादाबयानी से कही गयी है।इस चिरपरिचित कशमकश से भरी कहानी में जीवन-मृत्यु सही गलत जश्न-ओ-मातम और नैतिक-अनैतिक के बीच झूलते कुछ ऐसे निहायत ही खूबसूरत और मासूम वजूदों को हम पायेंगे जिनसे मिलने की उत्कंठा हर खास-ओ-आम को होती है।हम सबको अपने सामाजिक दायरे मे कहीं कहीं ऐसे हालात किरदार हादसे मिलते जायेंगे। तो फिर आइये साथ गोता लगाते हैं एक दूसरे के साथ भँवरों मे चक्कर लगाते हैं उसी तिलस्मी दास्तान के जो अब आपके हाथ मे है।.
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