न्याय : इस कहानी में हज़रत मुहम्मद के काल की एक घटना का चित्रण है। यह न सिर्फ उस समय के अरब साम्राज्य की सामाजिक व्यवस्था पर प्रकाश डालती है बल्कि उस समय के धर्मानुरागों के प्रति भी पाठक-मन को आंदोलित करती है। सामाजिक जिम्मेदारियों तथा पारिवारिक दायित्वों के बीच उलझे एक मुखिया की व्यथा को बहुत ही सारगर्भित तरीके से उकेरती है। कहानी मुख्यतः तीन पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती है; हज़रत मुहम्मद उनकी बेटी जैनब और दामाद अबुलआस। इस्लाम धर्म को लेकर दो समुदायों के मध्य पनपा आक्रोश और उसमें पिसती जनता और उन्हें न्याय दिलाने की प्रक्रिया में कार्यरत हज़रत मुहम्मद जब अपनी बेटी के पति के साथ न्याय करने में खुद को असक्षम महसूस करते हैं तो उनकी अंदरूनी व्यथा उन्हें हमेशा विचलित करती है परन्तु उनका यह विश्वास है कि 'न्याय करनेवाले व्यक्ति को पक्षपात और द्वेष से मुक्त होना चाहिए। बाद में जब यह बात उनका दामाद समझता है तो उसका हृदय परिवर्तन हो जाता और पुनः उनकी पुत्री का जीवन सुखमय हो जाता है।<br>हिन्दी साहित्य के यशस्वी लेखक मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं ने कोटि-कोटि पाठकों के हृदय को छुआ है साथ-ही-साथ अन्य भाषाभाषियों को भी प्रभावित किया है। उनकी रचनाएं साहित्य की सबलतम निधि है। प्रेमचंद की सम्पूर्ण कहानियां मानसरोवर के आठ खंडों में प्रकाशित हैं।