सिर्फ़ तुम मेरे लिए शायरी या कविता ही नहीं हो। सिर्फ़ तुम मुझ पर छाये सुरूर के पलों के गवाह भी हो। सिर्फ़ तुम संगीत की सरगम हो नए रंगो का ब्याँ भी हो। सिर्फ़ तुम मेरी नज़र भी हो और नज़र में भी हो। सिर्फ़ तुम हर कहानी के सूत्रधार हो और पात्र भी तुम्हीं तो हो…..