जीवित मंदिर - : सहज का अर्थ होता है कि हवा-पानी की तरह हो जाए।जीच में बुद्धि से बाधा न डालें।जो हो रहा है उसे होने दें। जो है उससे भिन्न होने की कोशिश मत करें।जो है उसे स्वीकार कर लें।जो है उसे जानें और जीएं।और इस जीने जानने और स्वीकार से आएगा परिवर्तन म्यूटेशन बदलाहट।और यह बदलाहट आपको वहां पहुंचा देगी जहां परमात्मा है।शिक्षा और जागरण-: उनके शब्द निपट जादू हैं__ -अमृता प्रीतमभारत ने अब तक जितने विचारक पैदा किए हैं वे उनमें सबसे मौलिक सबसे उर्वर सबसे स्पष्ट और सर्वाधिक सजनशील विचारक थे। उनके जैसा कोई व्यक्ति हम सदियों तक न देख पाएंगे। ओशो के जाने से भारत ने अपने महानतम सपूतों में से एक खो दिया है। विश्वभर में जो भी खुले दिमाग वाले लोग हैं वे भारत की इस हानि के भागीदार होंगे।खुशवंत सिंह सुविख्यात पत्रकार एवं लेखक