जीवित मंदिर -: सहज का अर्थ होता है कि हवा-पानी की तरह हो जाए।जीच में बुद्धि से बाधा न डालें।जो हो रहा है उसे होने दें। जो है उससे भिन्न होने की कोशिश मत करें।जो है उसे स्वीकार कर लें।जो है उसे जानें और जीएं।और इस जीने जानने और स्वीकार से आएगा परिवर्तन म्यूटेशन बदलाहट।और यह बदलाहट आपको वहां पहुंचा देगी जहां परमात्मा है।मैं कहता आंखन देखी-: ओशो किसी भी विषय पर बात करें उस आपको सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। जो भी लोग सोचते हैं रचनात्मक हैं विचारशाली हैं वे सभी ओशो से प्रभावित होते हैं क्योंकि हर चीज को देखने के लिए ओशो के पास एक नजरिया है जो सबसे भिन्न है और ताजा है।जीवन क्रांति -: ओशो के प्रखर विचारों ने ओजस्वी वाणी ने मनुष्यता के दुश्मनों पर संप्रदायों पर मठाधीशों पर अंधे राजनेताओं पर जोरदार प्रहार किया। लेकिन पत्र-पत्रिकाओं ने छापीं या तो ओशो पर चटपटी मनगढंत खबरें या उनकी निंदा की भ्रम के बादल फैलाए। ये भ्रम के बादल आड़े आ गये ओशो और लोगों के। जैसे सूरज के आगे बादल आ जाते हैं। इससे देर हुई। इससे देर हो रही है मनुष्य के सौभाग्य को मनुष्य तक पहुंचने में।