About the Book: पाषाण-युग ''विदेह'' अरविन्द कुमार की सात हिंदी कहानियों का संकलन! संकलन की पहली कहानी ‘ब्लॉक का पेड़’ आज के समाज में घटते आपसी सौहार्द्र एवं अजनबियों के प्रति बढ़ते अकारण वैमनस्य को बिंबित करती हुई सचाई है। ‘मेरी ज्ञाति’ भारत में जातियों के हास्यास्पद ‘प्रहसन’ – फ़ार्स - को चित्रित करके इसकी विद्रूपता को व्यंजित करती है। ‘हिंदू-मुसलमान’ साम्प्रदायिकता के प्रश्न को व्यक्तियों – दो घनिष्ट मित्रों - के स्तर पर परीक्षण करके देखती है। ''मुर्गबाज’ समय की नब्ज पर हाथ रखने की कोशिश है। ‘मंदिरों मस्जिदों गुरुद्वारों गिरजाघरों में …’ साम्प्रदायिक कट्टरता की निरर्थकता को व्यंजित करने के लिए है जो मृत्यु के पर्दे के पीछे कितनी हास्यास्पद बन जाती है! ''ऐ अधर्मी!'' - आदमी की नश्ल को बदलने की नाहक कोशिश कही जा सकती है। पसंद आए तो प्रशंसा भी कर दीजिए स्वीकार्य है! About the Author: ‘विदेह’ अरविन्द कुमार 6 अप्रैल 1957 को जन्मे एक छोटे से बसेरे से आए हुए अत्यंत अभावग्रस्त माता-पिता की संतान जिन्हें खाने-कमाने का तो शऊर ख़ैर नहीं था किंतु जो उच्च आदर्शों के साथ जीते थे और व्यवसाय के नाम पर अध्यापन या ट्यूशन देकर आजीविका कमाने की कोशिश करते थे ‘विदेह’ अरविन्द कुमार भौतिकी में स्नातकोत्तर हैं साथ ही एक वरिष्ठ बैंकर भी रह चुके हैं। उनके शौक़ों में पढ़ाई - चाहे वह हिंदी साहित्य हो चाहे अंग्रेज़ी लिटरेचर या कुछ-कुछ संस्कृत साहित्य - मुख्य है जिसमें वह विश्व-साहित्य को प्राथमिकता देते हैं। उनकी रचनाएँ ‘कादम्बिनी’ जैसी लब्ध-प्रतिष्ठ पत्रिकाओं में काफ़ी पहले छप चुकी हैं और उनके अन्य लेख एवं कविताएँ अन्य हिंदी अंग्रेज़ी पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहे हैं।