ओशो ने कहा है कि ''जहां अज्ञान है वहीं अहंकार हो सकता है और जहां अहंकार है वहीं अज्ञान हो सकता है। अज्ञान ही पाप है। शेष सारे पाप तो उसकी छाया ही है।'' अज्ञान को केवल शिक्षा से ही मिटाया जा सकता है। आज भी महिलाएं बड़ी संख्या में अशिक्षित हैं जो शिक्षित भी हैं उनमें से ज्यादातर महिलाएं पूरी शिक्षित नहीं हैं। जो सुशिक्षित हैं वे पुरुष प्रधान समाज की सोच से प्रभावित हैं। इस वजह से वे स्वयं से कमजोर महिलाओं को दबाती रहती हैं और इसके साथ ही अंधविश्वासों और कुप्रथाओं को मानने के लिए उन्हें बाध्य करती रहती है। शिक्षा ही एकमात्र ऐसा साधन है जो अविकसित और अशिक्षित स्त्री और पुरुष दोनों को ही अंधविश्वासी से आत्मविश्वासी बनाती है। आज जो समाज जो परिवार और जो राष्ट्र शिक्षित हैं. वहां न तो कोई अंधविश्वास है और न ही रूढिगत प्रथा ही हैं। वहां तो केवल उजाला ही उजाला है। बेशक शिक्षा से जीवन में उजाले का प्रवेश होता है जो व्यक्ति को समृद्ध स्वस्थ सुन्दर और बुद्धिमान बनाने के साथ-साथ यशस्वी भी बनाता है। आप रूढ़ियों को तोड़ें आप उनको अच्छी सीख दें शिक्षित करें तो उनसे कहें कि वह दूसरों को भी इसी तरह शिक्षित करें। सीखने और सिखाने की जब एक कड़ी बन जाएगी तो फिर विकास होता चला जाएगा। फिर वह रूकेगा नहीं।