अनुभव जनित कहानियों का यह संकलन वर्तमान समाज में फैली स्थिति को भली भांति प्रतिविंबित करता है। जब कोई परिवार अनुचित साधनों से कमाई गई संपत्ति से अमीर बन जाता है तो वह अपने पड़ोस का भक्षण भी शुरू कर देता है। यह भक्षण आर्थिक भौतिक मानसिक शारीरिक या अन्य किसी भी तरह का हो सकता है। इस कथा संग्रह को पढ़ने के बाद आपको भी शायद अपने पड़ोस में कोई ऐसा पड़ोस भक्षी परिवार मिल जाए जिसको आप इसके माध्यम से पहचान सकें। यह परिस्थिति तब और कारुणिक हो जाती है जब शिकार बन रहे लोगों में एकता धन व समझ तीनों का ही अभाव हो। इस पुस्तक की कहानियां आपको बहुत सजीव और मजेदार भी लगेंगीं। आपको लगेगा जैसे आप कोई धारावाहिक देख रहे हैं।