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About The Book
Description
Author
कविताएं बोलती हैं भावना के विभिन्न रूपों में शब्दों की नाव चढ़ तिरती रहती हैं मन की नदी में उतराती तरंगों इस पुस्तक का पहला पन्ना प्रेरणा का द्वार खोलता है वहीं अंतिम पृष्ठ सुकून देता है। प्रस्तुत कविताऐं अनुभवों को भागीदार बना साथ साथ चलती हैं वहीं सार्थक निर्माणों की ओर प्रेरित करती दीखती हैं । समय रिश्ते असमंजस हर मोड़ के धरातल पर संवेदना के साथ खड़ी ये कवितायें आत्म संतुष्टि देती हैं। दूब हूं मैं चट्टानों पर उगना मेरी फितरत है नहीं डरती आंधियों से नहीं झुकती बरगद को देखकर मैं दूब हूं हरी हरी - आशा करण