Pair Pahiye aur Pankh

About The Book

जाने माने टेक्नोकेट साहित्यकार राजेश जैन के देशी विदेशी संस्मरणों का खुशबूदार बहुरंगी गुलदस्ता...‘विमान धरती के ऊपर उड़ रहा है। जब मन चाहा खिड़की से धरती को देख लिया। मन बिलकुल उस छोटे बच्चे सा हो रहा है जो मेले में माँ की ऊँगली छोड़कर स्वतंत्रा घूमना तो चाहता है पर बीच बीच में माँ को जरूर देखता रहता है-यह आश्वासन पाने के लिए कि वह अकेला नहीं है-माँ आसपास बनी हुई है।’‘रूई से बादलों को देखकर लगा-काश इनसे गद्दे बना पाते रजाई बनाकर ओढ़ लेते घाव लगने पर इनके फाहे से साफ करते। पेरिस पहुँचे कई जेट विमान आकाश में इधर -उधर उड़ रहे थे-पीछे धुएं की पूँछ से ऐसा लग रहा था मानो कई सरल रेखाएँ आड़ी तिरछी किसी ने आसमान के बोर्ड पर खींच दी हैं।’‘बाद में भारत लौटने पर जब मैंने अपनी ई-मेल देखी तो शेला हेली ;अमरीका के बेस्ट सेलर लेखक स्व. आर्थर हेली की पत्नी) का पत्र सामने था-प्रिय राजेश पिछले सप्ताहंत पर जब मैं केलिफोर्निया से वापस आई तो लीफोर्ड के गेट पर तुम्हारा पत्र मिला। पूरे अक्टूबर माह मैं बाहर थी और मुझे बेहद खेद है कि जब तुम बहामाज आए तो मैं वहाँ नहीं थी। यद्यपि मैं कभी इंडिया नहीं गई... पर जाना जरूर चाहती थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय मेरे पति आगरा में कार्यरत थे। वे रायल एयरफोर्स में पायलेट थे और प्रायः प्रतिदिन ताजमहल के ऊपर से उड़ान भरते थे।- वाह आर्थर हेली ताजमहल के ऊपर से हवाई जहाज उड़ाया करते थे। जरूर ताज के सौंदर्य की प्रेरणा उनके लेखन में कहीं न कहीं रही होगी?‘जिस किसी भी शहर में रहा हूँ उससे दोस्ती करने की इच्छा मन में तब पलती रही है। कई वर्षों तक भोपाल से दोस्ती की यह खिचड़ी पकती रही। एक बातचीत उस शाम भी हुई-झील से लगा हुआ अहमदाबाद पैलेस। झील के किनारों पर अँधेरे का घेरा बढ़ने लगा था। वह थका हुआ अँधेरा अस्त व्यस्त था। पार्टी थी नवाब पटौदी के सुपुत्र ;आज के फिल्म स्टार सैफ अली खान के अकीका की। सौंदर्य की प्रतिमा सी गर्भवती शर्मिला टैगोर भी वहाँ थी...’
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