मेरे लिए लिखना अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिए जरूरी है अपनी बात शब्दों में कहकर एक जरूरी बौद्धिक मानसिक दबाव से मुक्त होने का प्राथमिक उपाय भी है। विचार क्रियान्वयन से पूर्व की जरूरी प्रक्रिया है इसलिए बोलते रहना जरूरी है मेरे लिए यह कहना तो ईमानदारी नहीं होगा कि कविता लिखना मेरे लिए मात्र स्वान्त सुखाय कार्य है हां कविता लिख कर एक सुखद अनुभूति तो अवश्य होती है लेकिन उसे दूसरे पढ़ें दूसरे सराहे और वह किसी कठिन वक्त में दूसरों के काम आए कुछ दूर तक दूसरों के साथ चले दूसरों की राह आसान करें यह भी मेरी इच्छा रहती है। मेरी सदैव यह कोशिश रहती है कि अपनी कविता में कोई नया शब्द कोई नया रोचक या आकर्षक कथन या विचार कोई नई संवेदना या भाव लाया जाए या ऐसा कोई भाव जो बहुत महीनता में उसे महसूस तो किया जा रहा है लेकिन शब्दों में सरलीकरण न किया गया हो उसे तार्किक व सरल शब्दों में भाव उत्कर्ष के रूप में प्रस्तुत किया जाए। मेरे लिए भाव सौंदर्य ज्यादा महत्वपूर्ण है न कि शब्दों की कलात्मकता।