‘पन्ना का सफ़र किलकिला से विध्यांचल तक’ - पन्ना के विभिन्न स्थानों में प्रत्यक्ष भ्रमण कर तथ्य इकट्ठे किये लोगों से बातचीत की उनके साक्षात्कार लिए संग्रहालयों का सहारा लिया पुराने भवनों और पुस्तकों को खंगाला और सबसे अधिक पन्ना के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानोंकी यात्रा और उनसे जुड़े लोगों के विचार जाने उनसे पन्ना के बारे में विभिन्न जनश्रुतियों कि सत्यता जानी परखी. साथ ही तुल्सीदात्ता मिश्र जी जिन्हें लोग ओझाजी कहते हैं के बारे में अनेकानेक भ्रांतियों और धारणाओं का परीक्षण किया और सत्यान्वेषण कर वास्तविक तथ्य खोज निकाले और इन्हें पुस्तक का आकार दिया
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