डॉक्टर साहब ने उस लाश को कृत्रिम श्वांस दी। लगभग दस मिनट बाद सांस नहीं लौटने पर उस व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया और कन्दनए सुनने के लिये तैयार हो गये। डॉक्टर ने मृत्यु को करीब से देखा था। कुछ लोगों को मृत्यु के एक माह पूर्व से ही काली छायाएँ दिखने लगती हैं। वे डरने लगते हैं। जब मृत्यु सन्निकट होती है। तो उन्हें ऐसा महसूस होता हैं कि कमरा कुछ रिक्त एंव स्तब्ध हो गया है। ऊपर पंखे की आवाज तेज हो जाती हैं। मगर अपने पति की मृत्यु सुनकर उसकी पत्नी पहले से ही तैयार थीए